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मैं क्या लिखता हूँ

  मुझे लिखने का शौक हैं, पर मुझे पता नहीं मैं क्या लिखता  हूँ। जब मैं बैठता हूँ एकांत बंद कमरे में, तो मैं अपने हाले ए दिल लिखता हूँ। जब मैं होता हूँ गुसे में तो लोगों की औकात लिखता हूँ, जब होता हूँ दुःखी तो मैं अपने हालात लिखता हूँ। मुझे लिखने का शौक है, पर मुझे पता नहीं मैं क्या लिखता हूँ। कभी अपने दर्द लिखता हूँ, तो कभी दर्द छुपा कर लिखता हूँ, जब मैं होता हूँ सहज, तो मैं प्यार मोहब्बत लिखता हूँ जब मिले धोख़ा तो उसी मोहब्बत को वेबफा भी लिखता हूँ। मुझे लिखने का शौक हैं, पर मुझे पता नही मैं क्या लिखता हूँ।। कभी मैं खुद को हारा हुआ बदनसीब इंसान लिखता हूँ, तो कभी मैं खुद को दुनिया का ताकतवर  इंसान लिखता हूँ। मुझे लिखने का शौक हैं, पर मुझे पता नहीं मैं क्या लिखता हूँ।। कभी सच्चाई लिखता हु, तो कभी अच्छाई लिखता हूँ, तो कभी मैं इस दुनिया की बुराई भी लिखता हूँ। मुझे लिखने का शौक हैं, पर मुझे पता नही मैं क्या लिखता हूँ।। कभी इश्क़ तो कभी धोख़ा लिखता हूँ, मैं आज के मतलबी रिश्तों की सच्चाई लिखता हूँ। कहीं लोग मेरी जिंदगी में आते हैं और चले जाते हैं मैं उन लो...

आज की बेटियां

क्या हुआ है आज की बेटियों को,  जो हुआ करती थी शर्म - ओ- हया की मिसाल   आज नये रंगों में बदलने लगे है इनके हालात।   जो थी घर की इज्जत, एक गहना संस्कार का,  अब वो चली है भटकने, रास्ते बेकार का।  फैशन के नाम पर शराफत छोड़ दी,  सोशल मीडिया के रंगों में शर्म मोड दी।  क्या हो गया है आज की नारी को,  अपने संस्कारों को भुला कर, अपनी राह भटका ली।।  माँ बाप की सिख लगे जैसे कोई पुरानी बात,  सोशल मीडिया की दुनिया में खो बैठी अपनी जात।   कल तक जो थी मासूम, वो चालक बन गयी,  प्यार के नाम पर एक साजिश रच गई।  कभी झूठे इल्ज़ाम, कभी केसों की मार,  मर्द की इज़्ज़त लुटे, करे अदालत से वार।।  तलाक का खेल, फिर गुज़ारे का दावा,  रिश्ते को बना दिया, बस एक सौदा काला।  कहीं जला दिए गए, कहीं मार दिए गए,  कुछ फँसते गए, कुछ बेकसूर मरते गए।  कल तक जो एक बेटी थी घर की लक्ष्मी  वो आज उस घर की विनाशनि बन गयी है,  खो रही है एक माँ से उसका बेटा,  क्यों एक नारी ईतनी कुरुर बनती जा रही है।।  क्या हो गया ...

वाह रे जमाने तु कैसा खेल, खेल रहा है .

वाह रे जमाने तु कैसा खेल खेल रहा हैं ।  आज का पत्ति अपनी बीवी को छोड़ कर ,  दूसरी औरतों से इश्क़ लड़ा रहा है ।।  वाह रे जमाने तु कैसा खेलों, खेल रहा हैं , बाप बेटा आज एक साथ बैठ कर दारु पी रहे हैं,  और कहीं तो एक साथ इश्क़ की बाते कर रहे है,   वाह रे जमाने तु कैसा खेल खेल रहा हैं । ।   इश्क़ के नाम पे इंसान को जानवर बना रहा हैं।   एक लड़का घुमा रहा है दस दस लड़कियों को और उसे मोहब्बत का नाम् दिया जा रहा है ।  वाह रे जमाने तु कैसा खेल, खेल रहा हैं ।।  मैं ये सब देख कर शर्मिंदा हुए जा रहा हु ,   यहाँ तो दस दस बर्ष की लड़कियों को इश्क़ , प्यार हुए जा रहा है।   वाह रे जमाने तु कैसा खेल खेल रहा हैं ।।   सोशल मीडिया पे हर कोई ज्ञान दिए जा रहा है ,  हकीकत में वो अपने संस्कार भूलते जा रहा है । वाह रे जमाने तु कैसा खेल ,खेल रहा है ।।  हकीकत में जो सच्चा प्यार और इज्जत दिये जारहा है   उसको धोखा और जलील किया जा रहा है ।  सब सच को छोड़ के झूठ को अपनाएं जा रहे है ,  वाह रे जमाने तु कैस...

मैंने बदलते देखें है

मैंने बदलते देखे हैं दिन बदलते रात , बदलते हालात देखे है मैंने बदलते अपनो के साथ देखें है ।  मैंने बदलते अपने यार देखें है,    मैंने बदलते अपने हर बार देखें है ।। मैंने बदलते लॉगो के लिहाज देखें है  मैंने बदलते लोगों के रिबाज् देखें है ।।   मैंने बदलते लॉगो के लेहजे देखें है   मैंने बदलते आप से तू तक देखें है ।।  मैंने बदलते यार से दुश्मन होते देखें है  मैंने बदलते दुश्मन से यार होते देखें हैं ।  मैंने बदलते वो प्यार मोहब्ब्त देखें है  मैंने बदलते उनके तौर तरीके देखें है   मैंने बदलते उनके हर् सलीके देखें है । ।  मैंने बदलते जिनसे प्यार था कभी  वो आज ब्लॉक लिस्ट में देखें हैं  मैंने बदलते जिनसे कभी वो नफ़रत करते थे  वहीं उनकी following लिस्ट में देखें है ।  मैंने बदलते उनके वादे देखें है  मैंने बदलते उनके इरादे देखें हैं ।  मैंने बदलते हर शख्स को देखा है  हर मतलब के लिए हर बार बदलते देखा है ।।   मैंने बदलते देखें हैं दिन ,बदलते रात ,बदलते हालत देखें है  मैंने...

सब बदल जाता हैं

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हर शख्स बदल जाता है जहां एक ज़माने के बाद , फिके पड जाते है नगमे जहां कुछ पल गुंगुनाने के बाद || कोई हमें बनाने आता है तो कोई हमें मिटाने आता , दिल इंकार नही कर पाता है उन्हे आपनाने के बाद || कोई हंस कर गले लगाता है तो कोई रोकर अपना बताता है , हर तकलीफ भूल जाया करते है हम उनके मुस्कुराने के बाद || कुछ झूठी मोहबत जताते है तो कुछ फ्रेब का महल बनाते हैं , मन सबका भर जाता है जहां दिल में बस जाने के बाद || हर रोज कुछ रिश्ते बनते है हर रोज कुछ बिखर जाया करते है, असलियत सबकी पता चलती है जहां कुछ वक़्त बिताने के बाद ||                                           सुनील कुमार संधूरिया

याद तो आता होगा

  याद तो आता ही होगा मैं उसे जब कभी वो उन जगहों पर जाती होगी जहां कभी हम दोनों साथ बैठा करते थे । याद तो तब भी आता होगा ना जब उसे उसका नया यार किसी और नाम से बुलाता होगा , जैसे कभी मैं भी उसे मोटो नाम से बुलाया करता था । याद तो उसे तब भी आता होगा ना जब वो मेरे से भी ज्यादा प्यार करता होगा । याद तो उसे तब भी आता होगा ना जब वो उसके हाथ को ना चुम कर उसके होंठों को चुमता होगा। याद तो तब भी आता होगा जब कभी उसकी लड़ाई हो जाती होगी तब शायद उसे याद मेरी भी आती होगी याद तो उसे तब भी आता होगा जब वो खुद की गलती कर के उससे ही  सॉरी बुलाता होगा । याद तो उसे तब भी आता होगा जब वो उसे छोड़ कर किसी और के साथ जाएगा तब जरूर उसे मैं याद  आऊंगा ।                                           सुनील कुमार सन्धुरिया

🙏भारत देश आज भी गुलाम हैं🙏

कहने को तो भारत देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए,  पर भारत देश आजाद हो के भी गुलाम हो गया।  हमें गोरे अंग्रेजों से तो आजादी मिल गई,  पर भारत आज गुलाम बन गया काले अंग्रेजों का।  भारत आजाद हुआ था अंग्रेजों के आत्याचारो से,  पर आज गुलाम हैं धर्मवाद और जाति वाद के आत्याचारो से।  क्या कसूर था एक छोटे से बच्चे का,  जिसकी स्कूल के मुख्यअध्यापक द्वारा पिट पिट कर हत्या की गई,,  जिस देश के विद्यार्थी को पानी के घड़े को छूने पर हत्या कर दी जाती हैं,  क्या उस देश को आजादी का नाम दिया जा सकता हैं?  आज देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा हैं,  पर उस दलित परिवार में मातम मनाया जा रहा हैं।  क्या इसको ही आजादी कहते हैं??  भारत देश में कोई हिंदु कोई मुस्लिम कोई सिख तो कोई ईसाई तो कई जाति के लोग पैदा होते हैं,  हे मेरे प्यारे भारत देश क्यों नहीं तु किसी इंसान को पैदा करता हैं।  भारत ने आजादी दी नशे, जुल्म, आत्याचार भ्र् ष्टाचार, जातिवाद, और धर्मवाद को,  क्यों नहीं मिली आजादी इंसानियत को?  कहने को तो भारत लोकतंत्र का द...

😍कैसे रिश्तें हैं😍

 ना जाने ये कैसे रिश्ते हैं आचनाक् से थम जाते हैं सब कुछ ठीक होकर भी एक दम से बदल जाते हैं!!  इतना वक़्त करीब होकर फिर अजनबी बन जाते हैं सब कुछ समज कर भी नासमज से नजर आते हैं!  सब कुछ कह कर फिर खामोश हो जाते हैं,  उम्र भर साथ का बादा कर के एक तरफा सा हो जाते हैं!!  ना जाने कैसे रिश्तें है आचनाक् से थम जाते हैं सब कुछ ठीक हो कर भी एक दम से बदल जाते हैं!!                सुनील कुमार संधूरिया               SK Sandhuria

कोई शायर कहता हैं

 कोई शायर कहता है कोई सुनील कहता है, कोई दोस्त या मित्र कहता है और कोई यार कहता है ! कोई भाई कोई भाई साहब कहता है हाँ कोई जनाब कहता है, कोई लफ्ज़ो का जादूगर कहता है कोई सच्चा और अच्छा हमसफर कहता है ! मगर जो दिल को छू जाए वो तो है दूर मुझसे, दूर रहकर भी हूँ मैं पास उसके वो कहाँ है दूर मुझसे ! कोई लेखक अच्छा कहता है और कोई कभी हमे खराब कहता है ! हमारे दिल मे जो आता है वही सच्चे और अल्फ़ाज़ लिखते हैं ! जो करती रहती है हरदम दिल मे हलचल वही ख्यालात लिखते हैं ! कभी जो लिख दें हम गलत तो हमें माफ़ कर देना, जिंदगी मे बहुत लोग आये और चले गए अभी तो रुक सुनील तु,  अभी बहुत आएंगे और जायेंगे ये तुझे जिंदगी का सच और झुठ अभी बहुत कुछ बतायेंगे!!!  तो फिर मिला कदम से कदम और चल यँहा तक ये जायेंगे अभी और देख और कितना तुझे रुलाएंगे!!  फिर दिखा दे तु भी इनको कि जिंदगी से केसे लड़ा जाता हैं!                                               सुनील कुमार संधूरिया     ...

🙏🙏🙏वो पल याद आएंगे🙏🙏🙏

 वो पल जो यारों के साथ बिताए थे,  अब आँखो मे बंद याद बन जायेंगे!  ना जाने अब कहा मुलाकात होंगी,  देर सबेर कब बात होंगी!!                  कमीने तो बहुत थे मेरे यार,                   पर मुशिकल में साथ होते थे मेरे यार!                   अब आयेगी मुसिबत तो किसे बताऊंगा ,                  ये जिंदगी की उलझन् कैसे सूलझाऊँगा!!!!  कुछ दोस्तों की दोस्ती याद आयेगी,  तो कुछ दोस्तों का दोस्त बनके दुश्मन बन जाना याद आयेगा,,!  वो दोस्तों के साथ बिताए हर पल याद आयेंगे,  वो टीचरों का प्यार याद आयेगा!!!!!                      कुछ दोस्तों को कभी भूल ना पाऊँगा,,                      उन दोस्तों का प्यार बहुत याद आयेगा!!!!  वो इंग्लिश,पॉलिटिकल, कंप्यूटर के टेस्ट याद ...

🙏🙏🙏केसा मुश्क़िल दौर हैं🙏🙏🙏

                  ये केसा मुश्किल् दौर हैं,  जिसने किया सबको को बंद कमरे में मजबुर् हैं!  बहुत कुछ सिखाया हैं इस दौर ने,  घर के रिश्तें क्या होते हैं, असली फरिश्ते क्या होते हैं,  ये केसा मुश्किल् दौर हैं,  जिसने किया सबको बंद कमरे में मजबुर् हैं!!!  कभी दिखती थी हर तरफ़ चेहेल् पेहेल् आज हर तरफ़ सनाटा छाया हैं,  ये केसा मुश्किल् दौर हैं,  जिसने हर शख़्स को बंद कमरे में रहना सिखाया हैं!!  ऐसा कभी न सोचा था कि ये मुश्किल् दौर आयेगा,  हम सब को अपने साथ  बहा ले जायेगा ये केसा मुश्किल् दौर हैं,  जिसने किया हम सब को मजबुर् हैं!!!  अब कोई जोड़ और तोड़ नहीं, हथियारों की होड़ नहीं,  काम न आये बम परमाणु, भारी पड़ गया छोटा सा किटाणु,  चारों तरफ़ मौत का ही डर छाया हैं,  यहाँ जाओ उधर कोरोना आया हैं,.  ये केसा मुश्किल् दौर आया हैं,  हर किसी को घर पर छुपाया हैं!!!  बंद पढ़े सारे रास्ते हैं, लोग जान गबा रहे सस्ते में हैं,.  बंद पड़े हैं सारे धंदे, अर्थी क...

शायरी 2

 मेरे हुनर को किसी शख़्स ने आईना दिखा दिया..........  मुझे था पढ़ने का शोक,,,,,  उसने तो लिखना सिखा दिया!!  मुँह पर कुछ और पीठ पीछे बदलती बात देखी हैं,,,  एक एक कर के मैंने सबकी औकात देखी हैं...!!  शायद मैं इसलिए पीछे हूँ,,,  क्योंकि मुझे होशियारी नही आती,,,,  वेशक् लोग न समझे मेरी वाफ़हदारी,,  मगर मुझे गरदारी नही आती..,..!!  अब वो मुझसे मिलने की फर्याद नही करती,,  आजकल वो मुझसे बात नही करती और,,,  मुझे हिचकियाँ नहीं आती हैं मेरे,,,,,,  दोस्त, लगता हैं वो मुझे याद नहीं करती...!!  सारी दुनिया की बाते ठुकरा कर,,,,  तुझे अपना बनाया था.......  लेकिन तु भी बही निकली,,,  जो दुनिया ने बताया था....!!  दिलों में रहना सीखो,,,,,  गरूर में तो हर कोई रहता हैं......  मुँह पे कहना सीखो,,,,,,  पीठ पीछे तो हर कोई बकता हैं.....!!  चूप रहोगे तो बात कौन करेगा,,,,,  हम न रहे तुम्हे याद कौन करेगा.. .  माना कि हम इतने अच्छे नहीं हैं कि कोई हमें याद करे,,,,,  पर हमारे मरजाने के बाद कौन त...

🙏🙏साथ छोड़ा था🙏🙏

  वो जो थे तेरे सच्चे साथी वो अब कहा हैं  क्यों हैं तु एकेला आज अजनबी की तरह!!  कहा गये वो जिनको तु हद से ज्यादा चाहता है, बता ए- सुनील तु मुझे, क्यों छोड़ा तुझे तरे उन सच्चे साथियों नें!!         बता तु कि उनका मतलब पुरा हुआ या फिर तु बुरा हुआ,         मैंने सुना था कि वो भी तुझे अपना बताते थे,         अब क्यों वो तुझसे बात करने से कतराते हैं!!        बता ए -सुनील क्यों तेरा उन्होंने तेरा साथ छोड़ा था!!  मैंने सुना हैं कि तुने सिर्फ दोस्ती के लिए उनके दुश्मनों से दुश्मनी कर ली थी,,  बता ए सुनील तु मुझे फिर तुझे ही क्यों उन्होंने दुश्मन बना लिया!!  मैंने सुना था कि वो भी तुझसे बहुत प्यार किया करते थे,  बता ए -सुनील वो सच्च में तुझसे प्यार करते थे या प्यार का सिर्फ दिखाबा ही करते थे!!  बता ए सुनील क्यों तेरा उन्होंने तेरा साथ छोड़ा था!!!       अब क्यों तु रोता हैं जब वो छोड़ गए,       जब वो तेरे पास आए थे तब तु क्यो...

🙏उन्हें हम याद आएँगे🙏

 बताओ क्या बतायेगे, मोहब्बत क्या जतायेगे,  चले वो रूठ कर हमसे उन्हें हम याद आयेगे!         चलो आज बात नहीं करते, कल हम चले जायेंगे,         बीते जो कुछ पल, उन्हें वो पल याद आएंगे!!  मेरी बातों में उनका घर, मेरा दिल आशियाना हैं,  चले वो तोड़कर मुझको, बताओ क्या सताएंगे!!         जुबान पर नाम हैं उनका, धड़कन में शुमारी हैं,         रग़ों में रहे बसते, उन्हें कैसे भुलाएँगे!        चले वो रूठ कर हमसे, उन्हें हम याद आएँगे!!  आँखों में बसे थे हम, हम ही सांसे रहे उनकी,  भुलाकर आज वो हमकों, कैसे सुलायेगी!!         कंही वो देर ना कर दे, बढ़े ना फासले,         अगर हम दूर जो निकले, हमें कैसे बुलाएँगे!!  कभी जो मौत भी आई, वो चेहरा संग आयेगा,  आँसु जो निकले, उन्हें कैसे छुपाएंगे!!         बदलना उनका देखा था, ना हामी हम बदलने के,         कभी ये नज...

🌷🌷🌷जिंदगी🌷🌷🌷

  फुर्सत में करेंगे हिसाब तुझसे ए- जिंदगी,  उलझे हुए है अभी हम खुद को ही सुलझाने में!      जिसका भी चेहरा छिला वो अंदर से और निकला,      मासूम सा कबूतर नाचा तो मोर निकला!!  फासलो का एहसास तो तब हुआ,  जब मैंने कहा ठीक हूँ, और उसने मान लिया!!      मैं वक़्त का मुजरिम हूँ,      लेकिन इस वक़्त ने मुझसे क्या इंसाफ़ किया!!  जब तक जीते हों तो जलते रहो,  जब जल जाओगे तो कहना माफ़ किया!!      तु कितनी भी खूबसूरत क्यों ना हों जिंदगी,      खुशमिजाज दोस्तों के बिना अच्छी नही लगती!!!                                  सुनील कुमार संधूरिया                             (SK Sandhuria) 

अकेले ही रहना हैं

 मुझे तो बस अब अकेले ही चलना हैं,  मैं थक चूका हूँ इस मतलबी दुनिया के साथ चलते चलते!  मुझे तो बस अब इस मतलबी दुनिया से दुर ही रहना हैं!!        बहुत हुआ अब मुझे ना किसी का साथ लेना हैं,        और ना किसी का साथ देना हैं,,,        मुझे तो बस अब इस मतलबी दुनिया से दुर ही       रहना हैं!!  बहुत जी लिया मैंने दुसरों के लिए,  बस अब खुद के लिए ही जीना हैं,,,  मुझे तो बस अब इस मतलबी दुनिया से दुर ही रहना हैं!!         अब ना मुझे किसी का प्यार ना किसीकी हमदर्दी        चाहीये,,,         बस अब मुझे अकेले ही रहना हैं,,,,         मुझे तो बस अब इस मतलबी दुनिया से दुर ही         रहना हैं!!  बहुत से लोग आये और खेल के चले गये बस अब ना किसी को पास आने देना हैं और ना किसी के पास जाना हैं,  मुझे तो बस अब इस मतलबी दुनिया से  दुर हीं रहना हैं!!      ...

रही होगी

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कुछ तो वजह रही होगी जो मुझसे ना कहीं होगी,  और मुझे यकिन हैं वो मुझे छोड़ कर नहीं जाती सच में कोई वजह बवाल रही होगी!!              ये कुदरत का करीशमा हैं कि गम में आँसू         निकल आते हैं,,         वरना बेवजह आँखें कहाँ लाल रही होगी!!!  कहने को तो हर शख़्स इश्क में वफा करता हैं,  फिर यह सबसे पहले बेवफाई किसके सर रही होगी!        लेला मजनूँ, हीर रांझा इनको सबने जाना हैं,         फिर् इनको पाक मोहब्बत में क्या कमी रही         होगी!!!  आजकल बंद पिंजरे में तोता मैंना गजब का इश्क करते हैं,.  और पिंजरा खुलते ही कौन तोता मैंना कब रही होगी!!!                            सुनील कुमार संधूरिया

सब अच्छा हैं

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हलात् अच्छे हों या बूरे फर्ज से मुकरा नही करते टूट कर पेड़ से फल कभी दुबारा जुड़ा नहीं करते!  और यहाँ जिंदगी जीनी हैं तो वकोफ् जिओ,  एहसानो तले जिंदगी जिया नहीं करते!!          तुम सच में सच्चे हों तो सच पर अड़े रहो,          वेबजहा झूठी दलिले दिया नहीं करते!          और मुनाफा हों खरीददार वहाँ रुका करते हैं         बाजारों में दुकानदार फिरा नहीं करते!!!  शहर की छोड़ो गांव का मोहोल भी अलग हैं आजकल एक छत के नीचे दो भाई रुका नहीं करते!!         मेरे ख्याल में सब अच्छा हैं, और जो ना देखा         बही सच्चा हैं,         और यहाँ हर शख़्स की फितरत हैं बदलना जो        ना बदला वही बच्चा हैं!!!!  सियासत में सियासी जो चाहें वो करता हैं,  पकड़ा गया तो झूठ बरना सब सच्चा हैं!!!          आराम हराम हैं कहना बड़ा सरल हैं,           मजदूर बन कर जनों...

भूल गए

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<meta name="rankz-verification" content="mVeGaViXUO7oD76g"> बेहाल इतने रहे थे हम कि,  आज अपने हाल भूल गए हम!        यह ऊँची उड़ान भरने वाले परिंदे,        लगता हैं गुलेल की मार भूल गए.....       और कुछ वक़्त तक खामोश क्या बैठा रहा सुनील      लगता हैं तुम दुनिया वाले मेरी तलबार की धार        भूल गए!!  मुझे बस बिश्वास घात के तीरों नें भेदा था,  और मुझे अपनाने के लिए उन्होंने अपने दोस्त को मेरे पास भेजा था!!!                  जमीं धूल मेरे नाम से हट जाएगी,             जब मेरे वक़्त की आंधी चल जाएगी!             और यह जो आज नफ़रत नफ़रत करते हैं ना,             ये भी सुनील के रंग में रंग जायेंगे,,,,,             एक वक़्त के बाद यह भी भीड़ का हिस्सा बन            जायें...

ऐ मेरे महबूब

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 ऐ महबूब मेरे! सुन एक संदेश मेरा, कि तू कैसी मोहब्बत मुझसे करना..! बड़े ख्वाब है मेरे हमसफर को लेकर, उसी की कुछ बातें मैं लिखता हूं..! कि तुम मेरे हमसफर मुझसे मोहब्बत ऐसे करना..? तुम पहली मोहब्बत अपने वतन से करना, जिस मिट्टी में तुम जन्मे हो..!  दूसरी मोहब्बत अपने धर्म कर्म से करना, जिसके लिए तुम इस दुनिया में आए हो..!  तीसरी मोहब्बत तुम अपने जन्मदाता से करना, जिसकी वजह से तुम इस दुनिया में आए हो..!  चौथी मोहब्बत अपने वफादार यारों से करना, जिसके साथ बैठकर तुम अपने दर्द में मुस्काए हो..!  पांचवी मोहब्बत तुम अपने खून के रिश्तों से करना, जिसने जन्म से लेकर साथ निभाया है..!  छठवीं मोहब्बत तुम अपनी पहली दिलरुबा से करना, जिसने मोहब्बत करना तुम्हें सिखाया है..!  सातवीं मोहब्बत तुम मेरे लिए खुद से करना, जो तुम मेरे हिस्से में आए हो..!  आठवीं मोहब्बत तुम मुझ नादान से भी करना, जिसकी मुस्कान बन कर लफ्ज़ों में समाए हो..!  मगर हां जो कभी दो रास्तों में उलझ जाओ तुम, मुझे या किसी और को चुनने में..? तो तुम उस दूसरे रास्ते पर ही जाना, मेरे पास आने के लिए किसी...